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Showing posts from January, 2018

बसंत पंचमी का अर्थ ( BASANT PANCHMI MEANING )

||ॐ|| वसन्त का अर्थ हुआ  वासनाओं का अन्त, और पंचमी पञ्च-तत्त्वों से बनी काया को कहते है। इस प्रकार पञ्च-तत्त्वों से बनी काया से वासनाओं का मिट जाना ही वसन्त-पंचमी है। वसन्त-पंचमी के दिन हम सरस्वती (स+रस+वती) की वंदना करते है। स मतलब वह परमात्मा, उस परमात्मा के  रस में इन्द्रियाँ डूब जाये, रसवत हो जायँ तो हो गयी वन्दना। इस प्रकार सरस्वती वन्दना का इतना ही मतलब है कि उस परमात्मा के भक्ति के रस से सरोबार हुआ जाय, नाकि किसी देवी (सरस्वती) की मूर्ति या तस्वीर खड़ी कर उसके पूजन-अर्चन में समय नष्ट किया जाय। साधना की अधिक जानकारी के लिए कृपया धर्मशास्त्र "यथार्थ गीता" का अध्ययन करें। ||ॐ श्री परमात्मने नमः|| 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌷🕉🌷🙏🏼🙏🏼🙏🏼

मृत्युभोज समाज में फैली कुरीति है व समाज के लिये अभिशाप है

मृत्युभोज से ऊर्जा नष्ट होती है महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि ..... मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है। जिस परिवार में मृत्यु जैसी विपदा आई हो उसके साथ इस संकट की घड़ी में जरूर खडे़ हों और तन, मन, धन से सहयोग करें , लेकिन......बारहवीं या तेरहवीं पर मृतक भोज का पुरजोर बहिष्कार करें। महाभारत का युद्ध होने को था, अतः श्री कृष्ण ने दुर्योधन के घर जा कर युद्ध न करने के लिए संधि करने का आग्रह किया । दुर्योधन द्वारा आग्रह ठुकराए जाने पर श्री कृष्ण को कष्ट हुआ और वह चल पड़े, तो दुर्योधन द्वारा श्री कृष्ण से भोजन करने के आग्रह पर कृष्ण ने कहा कि ’’सम्प्रीति भोज्यानि आपदा भोज्यानि वा पुनैः’’ अर्थात् "जब खिलाने वाले का मन प्रसन्न हो, खाने वाले का मन प्रसन्न हो, तभी भोजन करना चाहिए।लेकिन जब खिलाने वाले एवं खाने वालों के दिल में दर्द हो, वेदना हो, तो ऐसी स्थिति में कदापि भोजन नहीं करना चाहिए।" हिन्दू धर्म में मुख्य 16 संस्कार बनाए गए है, जिसमें प्रथम संस्कार गर्भाधान एवं अन्तिम तथा 16वाँ संस्कार अन्त्येष्टि है। इस प्रकार जब सत्रहवाँ संस्कार बनाया ही न...